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आईसीएमआर-एनआईएमआर क्षेत्रीय इकाई- नाडियाद, गुजरात

आईसीएमआर-एनआईएमआर क्षेत्रीय इकाई की स्थापना मलेरिया के जैव वातावरणीय नियंत्रण की संभाव्यता के प्रदर्शन के लिए मार्च 1983 में नाडियाद जिला खेड़ा में की गई थी। खेड़ा जिले को चुनने का कारण महामारी स्थिति के बढ़ने और कार्यक्रम द्वारा अन्य परिचालात्मक और तकनीकी बाधाओं का सामना करना था। यह परियोजना नाडियाद तालुका के 7 गांवों में आरंभ की गई थी। जिसका उद्देश्य कीटनाशकों के उपयोग के बिना जैव पर्यावरणीय पद्धतियों का उपयोग करते हुए मलेरिया नियंत्रण का प्रदर्शन करना था और एक लागत प्रभावी मॉडल का विकास करना था। जिसे देश के अन्य भागों द्वारा भी अपनाया जा सके। नीति के मुख्य घटकों के अंतर्गत मच्छर प्रजनन के साधनों की कमी, मच्छर डिम्भकनाशी मछलियों और अन्य एजेंडों का उपयोग करते हुए जैव नियंत्रण, सामुदायिक स्वास्थ्य शिक्षा, सामुदायिक भागीदारी, बढ़ते हुए मामलों का पता लगाना और उपचार, पर्यावरणीय विकास और अंतर एकक समन्वय आदि शामिल है। अध्ययन क्षेत्र को क्रमिक रूप से वर्ष 1987 से 7 लाख आबादी वाले कापड़गंज तालुका समग्र नाडियाद को शामिल करते हुए बढ़ाया गया था। खेड़ा परियोजना की सफलता के आधार पर इस नीति को मिशन मोड के माध्यम में देश के विभिन्न भागों में स्थित 12 और क्षेत्रीय इकाईयों में जाँच की गई थी। खेड़ा प्रोजेक्ट से प्राप्त अनुभव को प्रसारित करने के क्रम में प्रौद्योगिकी कार्यशालाओं का स्थानांतरण और विभिन्न श्रेणी के स्वास्थ्य कार्मिकों जैसे कि जिला मलेरिया अधिकारियों, पीएचसी चिकित्सा अधिकारियों, राज्य स्वास्थ्य विभाग नगर-निगम के विभिन्न कार्मिकों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।

क्षेत्रीय इकाई के विभिन्न अनुसंधान परिणामों के कारण आवश्यक विज्ञानीय कार्य प्रदान करते हुए, स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकारियों की मध्यस्थता कार्यों को मजबूत करना था। क्षेत्रीय इकाई मेडिकल कॉलेजों के स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान करके राज्य/राष्ट्रीय कार्यक्रम को तकनीकी समर्थन प्रदान करती है। राज्य स्वास्थ्य व्यक्तियों को दोनों प्रकार के प्रशिक्षण:-1. जिला/तालुका स्वास्थ्य पर्यवेक्षणों को चिकित्सा की विज्ञानीय परीक्षण। 2. गुजरात के सभी जिलों के प्रयोगशाला तकनीशियनों को मलेरिया सूक्ष्मदर्शी प्रशिक्षण आदि के द्वारा क्षमता निर्माण करना है। क्षेत्रीय इकाई द्वारा अपर निदेशक(स्वास्थ्य)संयुक्त निदेशक, एनवीबीडीसीपी, गांधी नगर, मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी, जिला मलेरिया अधिकारी और नगर निगम के साथ गहन समन्वय करते हुए अनुसंधान गतिविधियाँ की गई। अनुसंधान कर्मचारियों द्वारा अनुसंधान परियोजनाएँ की जा रही है।

आईसीएमआर - राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर - एनआईएमआर)

अनुसंधान कर्मचारी/अधिकारी

  1. 1. राजेन्द्र कुमार बाहारिया, वैज्ञानिक-बी एवं प्रभारी अधिकारी
  2. 2. प्रतीक्षा देसाई, सीनियर तकनीकी अधिकारी
  3. 3. वी. डी. परमार, तकनीशियन

चालू अनुसंधान परियोजनाएँ

  1. Epidemiology of malaria in pregnant women and assessment of prevention and treatment strategies in Gujarat.
  2. Economic loss associated with dengue and chikungunya in rural and urban setting of central Gujarat.
  3. Assessment of the coverage, Use rate and Physical integrity of Long Lasting Insecticide Net after scaling up of their distribution in Gujarat, India.
  4. Malaria associated with Canal irrigated (SardarSarovar) in Surendranagar District, Gujarat.
  5. Monitoring the Efficacy of ACT for the treatment of uncomplicated Plasmodium falciparum malaria in India.
  6. Phase III evaluation of three formulations of Natular (20.6% EC, 2.5% G30 and 48% DT) against immature of Aedes aegypti and Anopheles stephensi and two formulations (20.6% EC, 2.5% G30) against Culex quinquefasciatus in three eco- epidemiological settings in India.

हाल ही के अनुसंधान प्रकाशन (पिछले 5 वर्ष तक)

  1. Van Eijk AM, et al. The burden of sub microscopic and asymptomatic malaria in India revealed from epidemiology studies at three varied transmission sites in India. Sci Rep 2019. PMID 31745160 Free PMC article.
  2. Khan V, et al. Entomological indicators during transmission season of dengue in Silvassa (India). J Parasit Dis 2015. PMID 26064033 Free PMC article.
  3. Eijk AM, et al. What is the value of reactive case detection in malaria control? A case-study in India and a systematic review. Malar J 2016 – Review.. PMID 26852118 Free PMC article.
  4. Joshi AP, Angel A, Angel B, et al. In-silico Designing and Testing of Primers for Sanger Genome Sequencing of Dengue Virus Types of Asian Origin. J Genomics. 2018;6:34–40. Published 2018 Apr 10. doi:10.7150/jgen.22460
  5. William J. Moss, et al. Malaria Epidemiology and Control within the International Centers of Excellence for Malaria. Am. J. Trop. Med. Hyg., 93(Suppl 3), 2015, pp 5-15.
  6. Haq S, and Srivastava HC. Efficacy of Aphanius dispar (Rüppell) an indigenous larvivorous fish for vector control in domestic tanks under the Sardar Sarovar Narmada project command area in District Kheda, Gujarat. J Vector Borne Dis 50, June 2013, pp. 137–140
  7. Srivastava RK, Haq S, Srivastava HC, Sharma VP. Review of the bioenvironmental methods for malaria control with special reference to the use of larvivorous fishes and composite fish culture in central Gujarat, India. J Vector Borne Dis 50, March 2013: 1–12
  8. Khan V, Zala DB, Srivastava HC. Entomological indicators during transmission season of dengue in Silvassa (India). J Parasit Dis.,5 July 2013 DOI 10.1007/s12639-013-0343-0 online

संपर्क विवरण

आईसीएमआर-राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय इकाई
सिविल हॉस्पिटल, नाडियाद
गुजरात-387001, भारत
दूरभाषः +91-268-252-1808, +91-7726986307
ईमेलः nimr.nadiad[at]gmail.com